Monday, 9 November 2015

(२७)-१-गौ- चि०-बायँ-वायुरोग ।


पशुओं में वायुरोग ( बाँय ) का होना
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१ - हन्न वायु


लक्षण व कारण - यह बड़ा ही भयंकर रोग हैं । इस रोग में घूम-घूम कर पशु नीचे गिर पड़ता हैं । उसके पाँव काँपते हैं , वह चारों पैर फैला देता हैं , पशु को अत्यधिक बेचैनी होती हैं ।
#- "घुमनारोग" से पीड़ित पशु घुमता हैं, इस रोग में पशु कुम्हार के बर्तन बनाने वाले मिट्टी के चाक की तरह घूमता रहता हैं , काँपता नहीं हैं , जबकि 'हन्न वायु, रोग में कम्पन्न व बेचैनी अधिक होती हैं । इस रोग में पशु का पेट फूल जाता है ।

१ - औषधि - इन्द्रायण ( नारून , नाहरून ) के दो फलों को पीसछानकर पशु को खिलाने से लाभ होता हैं ।

प्रतीकात्मक चित्र 


२ - औषधि - बाघ का माँस खिलाने से तुरन्त लाभँ होता हैं ।

३ - औषधि - बारहसिंगा के सींग को पत्थर पर पानी की कुछ बूँदें डालकर सींग को घिसकर चन्दन की तरह बना लें फिर पशु को पिलाना चाहिएे यदि सींग न मिले तो बारहसिंगा के मिगंन ( लेंडी ) को पीसकर खिलाना भी लाभप्रद हैं ।

४ - औषधि - हिरण की नाभि को पीसकर पिलाना भी अति गुणकारी होता हैं ।

५ - औषधि - गाय का दूध १ लीटर , और गाय का घी २५० ग्राम , दोनों को मिलाकर देने से भी लाभ होता हैं ।