Saturday, 7 November 2015

(२४)-गौ-चि०-सिर के रोग- सींगरोग ।

(२४)-गौ-चि०-सिर के रोग- सींगरोग ।

१ - सींग का टूट जाना
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यदि सींग टूटने पर रक्त बह रहा हो तो सींग के ऊपर पुरूष के बाल लपेटकर कपड़ा बाँध दें और उसके ऊपर गाय का या बकरी का दूध या अलसी का तेल व कपूर मिलाकर पट्टी को तेलकपूर से तर कर दें । इस प्रयोग से यथाशीघ्र लाभ होता हैं । यदि इस प्रयोग के क्रियान्वयन से ख़ून बहना नहीं रूकता है तो फिटकरी मिले हूए ठण्डे जल से तर करके पट्टी बाँधकर इसके बाद ऊपर वाली दवा का प्रयोग करना चाहिए ।


२ - सींग मे कीड़ा लगना तथा टूट जाना
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पशु सींग के आस- पास घाव , फोड़ा - फुन्सी आदि की उपेक्षा करने से अथवा चोट आदि से सींग के टूट जाने पर घाव होकर उसमें कीड़ा लग जाता हैं । इसकी पहचान यह हैं कि जब पशु के सींग मे कीड़ा लग जाता है तो पशु अपना सींग बार- बार पेड़ या खम्बा व दिवार या पेड़ मे रगड़ता रहता है । कीड़ों का प्रभाव अधिक होने पर सींग एक तरफ़ को झुक जाता हैं ।

१ - औषधि - यदि सींग मे कीड़ा लगने का सन्देह हो तो आसपास की जगह नीम की पत्तियों के उबले पानी को गुनगुना करके साफ़ करना चाहिए की कही कोई छेद तो नही हैं या घाव तो नही हैं । यदि ऐसा हो तो तारपीन के तैल मे फाहा तर करके उसके अन्दर लगा देना चाहिए ताकि अन्दर के कीड़े मर जाते हैं । दिन में २-३ बार यही उपचार करें ।

२ - औषधि - फिनायल में साफ़ रूई का फाहा तर करके लगा देना चाहिए । इस उपाय से भी कीड़े मर जाते हैं ।

३ - औषधि - यदि कीड़ों के प्रभाव से सींग झुक गया हो अथवा चोट लगने से टूट गया हो तो उसे आरी से काटकर अलग कर देना चाहिए । इस क्रिया से ख़ून बहेगा - उसे रोकने के लिए ठण्डे पानी मे फिटकरी घोलकर उसमे पट्टी तर करके लगाकर बाँध देनी चाहिए ।

४ - औषधि - ख़ून बहना पूर्णरूपेण रूक जाने पर ड्राम फिटकरी और १ भाग तुतिया ( नीलाथोथा ) बारी- बारीक पीसकर उस पर बुरक देना चाहिए । ऊपर से साफ़ रूई रखकर कपड़े की गद्दी देकर कसकर पट्टी बाँध दें । तदुपरान्त घाव के इलाज की भाँति उसका इलाज करें ।


३ - सन्निपात रोग
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एक ही स्थान पर बहुत दिन तक पशु को बाँधकर पुष्टीकारक चारा व दाना न देने से अथवा एकाएक सिर में रक्त बढ़ जाने से यह रोग हो जाता हैं । इस रोग से ग्रसित पशु की आँख का रंग लाल हो जाता हैं तथा मुर्छित होकर गिर पड़ता हैं । उसकी श्वास की गति बढ़ जाती हैं ।
# - औषधि - रोगी पशु के नाक व कान की फस्द खोल कर मस्तिष्क प्रदाह की चिकित्सानुसार चिकित्सा करनी चाहिए ।


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